राष्ट्रीय कार्यकारणी सूचि (24-अक्टूबर 2016)

श्री उपेन्द्र कुशवाहा ( राष्ट्रीय अध्यक्ष , सह केन्द्रीय राज्य मंत्री )

उपाध्यक्ष 

1.) श्री शंकर झा आजाद 
2.) श्री दशई चौधरी

प्रधान महासचिव 

1.) श्री राम बिहारी सिंह 

कोषाध्यक्ष 

1.) श्री राजेश यादव 

महासचिव 

1.) श्री फजल इमाम मालिक, प्रवक्ता 
2.) श्री राजीव जायसवाल 
3.) श्रीमती मालती कुशवाहा
4.) श्री क्रांति प्रकाश
5.)  श्री महेंद्र प्रताप
6.) श्री जगन्नाथ गुप्ता 
7.) श्री (डॉ ) एस. एन राना
8.) श्री ई. सत्यनारायण महतो 
9.) श्री रामबाबू सिंह 
10.) श्री अनिल सिंह
11.) श्री अंगद कुशवाहा 
12.) श्री प्रदीप मिश्रा
13.) श्री जहाँगीर खान 
14.) श्री नचिकेता खान 
15.) श्री अभयानंद सुमन 
16.) श्री राकेश जैन 
17.) श्री अरुण कुशवाहा 

प्रवक्ता 

1.) श्री बालेन्द्र कुमार 
2.) प्रो . अनिल कुमार 

सचिव 

1.) श्री सुधांशु शेखर ( विधायक) 
2.) श्री विजेंद्र कुमार निशंक 
3.) श्री संतोष भगत 
4.) श्रीमती संजू प्रिया
5.) श्री शशि कुमार झा 
6.) श्री इंद्रा कुमार मौर्या 
7.) श्री शशांक प्रियदर्शी 
8.) श्री रामनेश ककुशवाहा
9.) श्री विरेन्द्र सिंह वर्मा 
10.) श्री ए. स. अहिमोहंनन

अध्यक्ष, संसदीय बोर्ड

1.) श्री राम कुमार शर्मा , सांसद 

अध्यक्ष , स्वक्छ्ता अभियान समिति 

1.) श्री रविन्द्र सिंह 

अध्यक्ष , युवा लोक समता 

1) मो. कामरान 

अध्यक्ष , महिला प्रकोष्ठ 

1.) श्री मती सीमा सक्सेना 

अध्यक्ष प्रोफेशनल प्रकोष्ठ 

1.) श्री आर. सी. प्रसाद 

अध्यक्ष, कला संस्कृति प्रकोष्ठ 

1.) श्री अशोक शिवपुरी 


चुनाव परिणाम NDA में हो रहा है होली का माहौल

भारत में राजनीतिक दांवपेंचोंकेसाथ साथ राजनीती सूझबूझ का सबसे बड़ा उदहारण राजनीती दलों की मूल प्रवृत्ति गठबन्धन है। इस प्रवृत्ति को देखते हुए इसका सबसे बड़ा उदाहरण है -राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन(NDA),यह एक कार्यकारी बोर्ड या पोलित ब्यूरो के रूप में एक औपचारिक संरचना नहीं है अपितु यह व्यक्तिगत रूप से कुछ दलों के नेताओं की महत्वाकांक्षा को पूर्ण करने के लिये सीटों के उपचुनाव में साझा रणनीति बनाने का उच्चतम उदाहरण है। राष्ट्रहित के मुद्दों पर निर्णय लेने अथवा संसद में उन मुद्दों को उठाते समय दलों के बीच विभिन्न विचारधाराओं को देखते हुए कभी सहमति तो कभी असहमति जैसी कठिनाई आती है लेकिन इनमे सम्मिलित पार्टियो ने अच्छा उदाहरण दिया है सूझबूझ का और मिलकर साथ बढ़ने का।

इस चुनाव का नतीजों नेराष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधनमे एक राजनीतिक गठबंधनको और भी मजबूत कर दिया है । इसका नेतृत्वभारतीय जनता पार्टीकरती है।विधान परिषद चुनाव मतदान की 24 सीटों के परिणाम मिल चुके हैं। परिणामों को आगामी विधान सभा चुनाव के परिप्रक्ष्य में देखें तो जदयू-राजद गठबंधन के लिए राह आसान नहीं है। दूसरी ओर भाजपा का कद बड़ा होता दिख रहा है।

यहाँ भाजपा का बढ़ना और साथ ही साथ उसके नेतृत्व के अंतरगर्त नमो के उदाहरणानुसार रालोसपा का आगे बढ़ना लाजमी है क्यूंकि इनसब में बिहार का भविष्य भी निर्धारित होता है क्यूंकि यहाँ से जंगल राज का खात्मा होना आवश्यक है।भाजपा ने 12 सीटों पर जीत दर्ज की है। भाजपा के छपरा से सच्चिदानंद राय, औरंगााबद से राजन सिंह व गोपालगंज से आदित्य पांडेय ने जीत दर्ज की है। भाजपा के हरिनारायण चौधरी समस्तीपुर से, सुनील सिंह दरभंगा से, दिलीप जायसवाल पूर्णिया से, संतोष सिंह सासाराम से एवं सुमन महासेठ मधुबनी से जीत चुके हैं।

भाजपा प्रत्याशी सिवान से टुन्नाजी, बेगूसराय से रजनीश कुमार व दरभंगा से सुनील सिंह भी विजयी रहे हैं। मोतिहारी से बबलु गुप्ता ने भी भाजपा के खाते में एक सीट डाली है।

राजग प्रत्याशी नूतन सिंह (लोजपा) ने सहरसा से जीत दज की है।

पटना से निर्दलीय रीतलाल यादव ने भी जीत दर्ज कर की है। कटिहार जीते से निर्दलीय प्रत्याशी अशोक अगवाल भाजपा समर्थित हैं।

इस चुनाव का आसार और परिणाम चौकाने के साथ साथ उत्तम भविष्य का भी संकेत है और अगर आगामी विधान सभा चुनाव अंतिम चरण को मद्देनजर रखते हुए मानें तो राजग की राह आसान होती दिख रही है जो की इस पार्टी में सम्मिलित पार्टियो के अच्छे भविष्य तथा एक अच्छे गठबंधन का उदहारण है ।


Counting has started at eight o'clock in the morning

With the election of the packages under local fixed quota of 24 seats for the Legislative Council the task of counting has started at eight o'clock in the morning. Much.Oh districts created in the way that the counting centers amid tight security, counting of votes continues.
According to the beginning of voting was held on July seven. The local authority and the workers involved in all subsidiaries around 1.38 lakh voters exercised their franchise and vote. Legislative Council election results, which is based on the premise that he Bvisy determine which political party associated with the upcoming elections in Bihar and understand that we are declaring a.
National Public parity party's two candidates were in the fray, BJP had fielded 18 candidates, four from the LJP. Similarly, the Janata Dal (United) and RJD put up candidates for the ten were four others on the seat of the alliance partners, the Congress and the NCP were candidates. For election at polling stations across the state made 534 voters had voted.
The electoral wave of recognition is sound and based on the lowest point of fixation. Almost all parties agree that the council election results show a trend in many ways the parties towards the common man. The implication is that all of the common man's trend is to the public, according to the chosen Pratyashi progress regarding fixed election BJP, JD-U, RJD, Congress, LJP, NCP and Ralospa were made on behalf of the candidates. Also a large number of independent candidates participated in the election.


एनडीए सरकार ने साढ़े चार गुणा पंचायती राज का बजट बढ़ाया

गया। भाजपा के बिहार विधान मंडल के नेता सह पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि इस बार के विधान परिषद चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के प्रत्याशियों की अप्रत्याशित जीत होने जा रही है। अभी राजग के पांच पार्षद विधान परिषद चुनाव मैदान में है। वहीं, जद यू, कांग्रेस एवं राजद के 19 पार्षदों चुनाव मैदान में है। उन्होंने कहा कि इतना तय है कि हम बढ़ेंगे। वहीं, यूपीए गठबंधन नीचे की ओर जाएगा। श्री मोदी गया में शुक्रवार की शाम भाजपा प्रत्याशी अनुज कुमार सिंह के आवास पर आयोजित प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित कर रहे थे।

भाजपा नेता श्री मोदी ने बताया कि यूपीए के मनमोहन सिंह की सरकार ने पंचायती राज के लिए पांच हजार करोड़ रुपया का बजट आंवटन दिया था। जबकि केन्द्र की राजग की नरेन्द्र मोदी सरकार ने पंचायती राज का बजट बढ़ाकर 23 हजार 500 करोड़ रुपया कर दिया। साथ ही राजग की मोदी सरकार पंचायती राज को विकास के मुद्दे पर और सशक्त बनाने के लिए कई अधिकार दी है। अब हर दो पंचायत पर एक कनीय तथा दस पंचायत पर कार्यपालक अभियंता की पदस्थापना की जाएगी। जो अपने कार्य क्षेत्र में करोड़ो रुपया की योजना को क्रियान्वित कराएंगे।

श्री मोदी ने आगे कहा कि नीतीश कुमार एवं लालू प्रसाद पहले अपराधी सरगनाओं को पालते-पोसते है। उन्होंने बताया कि अनंत सिंह के बड़े भाई दिलीप सिंह को लालू यादव ने मंत्री बनाया। नीतीश कुमार अपनी सभा में भीड़ जुटाने के लिए अनंत सिंह का इस्तेमाल करते रहे है। उन्होंने गया के जद यू प्रत्याशी मनोरमा देवी के पति बिंदी यादव पर कटाक्ष करते हुए कहा कि बिंदी यादव कौन हैं? किस आरोप में जेल गए? पूरे बिहार को पता है। पटना में कुख्यात अपराधी सरगना रीतलाल यादव परिषद का चुनाव लड़ रहा है। राजद का महासचिव है। लालू यादव अपनी बेटी मीसा के लिए लोकसभा चुनाव के समय समर्थन मांगने रीतलाल के घर गए थे। आज वहां से जद यू प्रत्याशी चुनाव लड़ रहा है। लेकिन लालू प्रसाद की इतनी ताकत नही रही कि वो युपीए प्रत्याशी का विरोध कर रहे अपने पार्टी के महासचिव रीतलाल के खिलाफ कोई कार्रवाई कर सके। श्री मोदी ने आगे कहा कि ऐसे नेताओं के बल पर बिहार में सुशासन आने का दावा नीतीश कुमार कर रहे है।

श्री मोदी ने जद यू के हाईटेक प्रचार पर चुटकी लेते हुए कहा कि नीतीश कुमार गुरुवार को भाजपा के गढ़ पटना सिटी में घरों में दस्तक देने गए थे। लेकिन वे वही गए जो उनके समर्थक थे। श्री मोदी के अनुसार इसके बावजूद जब घर की महिलाओं ने मुख्यमंत्री श्री कुमार से कई सवाल कर जबाव मांगना शुरु किया तो नीतीश कुमार के पास कहने के लिए कोई जबाव नही था। उन्होने कहा कि पटना में जब जद यू प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ बाबू को जनता ने पर्चा पर चर्चा कार्यक्रम के तहत घेरा। तब वशिष्ठ बाबू को जबाव देते नही बना। वशिष्ठ बाबू को जनता के सवालों ने भागने पर मजबूर कर दिया। श्री मोदी ने कहा कि जद यू के पास कार्यकर्ता है ही नही। भाजपा का मुकाबला कहां से जद यू करेगा। अब जनता जद यू को दस्तक देकर सवाल पूछेगी कि जबाव दो कि नालंदा एवं सीतामढ़ी में भीड़ पीट-पीटकर हत्या कर दे रही है। क्या यही सुशासन है? इस मौके पर सांसद हरि मांझी, विधायक प्रेम कुमार, श्यामदेव पासवान, वीरेन्द्र सिंह, सुरेन्द्र सिन्हा, अनिल कुमार, रामाधार सिंह, विधान पार्षद कृष्ण कुमार सिंह, राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता, भाजपा प्रत्याशी अनुज कुमार सिंह सहित एनडीए के सभी जिलाध्यक्ष व कई नेता उपस्थित थे।


उत्तर बिहार के क्षेत्रों में चुनावी लहर के दौरान परिणामगत एनडीए का कद ऊँचा

उत्तर बिहार के क्षेत्रों में चुनावी दौर में विधान परिषद की सात सीटों के लिए पूर्णता हुई गणना के अनुसार चुनाव की मतगणना में सुरक्षा के कड़े इंतजाम के बीच मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, दरभंगा और पश्चिमी चंपारण के चुनावी नतीजे सर्वसाधारण रूप से घोषित कर दिए गए । गौरतलब है की देश में भाजपा की सरकार के अन्तगर्त होने की वजह से चुनाव में पुख्ता इन्तेजाम किये गए थे।
दोपहर तीन बजे तक की सूचनाओं के आधार पर , मुजफ्फरपुर में जदयू प्रत्याशी दिनेश 5093 मतों से चुनाव जीत गए हैं। और अलग स्थानो से आई रिपोर्ट क अनुसार , समस्तीपुर व दरभंगा में भाजपा के हरिनारायण चौधरी 1620 और सुनील कुमार सिंह 944 मतों से जीत गए। पश्चिमी चंपारण में कांग्रेस के राजेश राम 617 मत विजयी हुए। ऐसे हालत में भी किसी स्थान से कांग्रेस का जितना आश्चार्यजनित रहा है। आम इंसान को इस सच को स्वीकारना हजम नही हो पा रहा है। साथ ही साथ चंपारण से भाजपा के बबलू गुप्ता 153 मतों से जीत गए हैं। मधुबनी में भाजपा के सुमन महासेठ जीत गईं हैं। सात सीटों पर कुल 45 उम्मीदवार मैदान में थे।
पश्चिमी चंपारण में कांग्रेस के राजेश राम 617 मतों से जीत गए हैं। यहां से तीन उम्मीदवार मैदान मेंं थे।
पूर्वी चंपारण में भाजपा के बबलू गुप्ता 153 मतों से जीत गए हैं। यहां से चार उम्मीदवार मैदान में थे।
मुजफ्फरपुर से जदयू-राजद गठबंधन के प्रत्याशी दिनेश सिंह 5093 मतों से विजयी। उन्होंने अपने निकट प्रतिद्वंद्वी प्रियदर्शिनी साही को पराजित किया। शाही को मात्र 368 मत मिले। कुल 6201 मत डाले गए थे। इनमें 5933 मत वैध मिले। यहां से छह उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे थे। मधुबनी में भाजपा की सुमन महासेठ ने अपनी जीत दर्ज की । यहां से सर्वाधिक 11 प्रत्याशी मैदान में थे।
दरभंगा से भाजपा प्रत्याशी सुनील कुमार 944 वोट से जीत गए। उन्होंने राजद के मिश्री लाल यादव को पहले चरण की मतगणना में प्रथम वरीयता वोटों की गिनती में ही शिकस्त दे दी। भाजपा प्रत्याशी सुनील को 2536 व राजद प्रत्याशी मिश्री लाल को 1592 वोट मिले। कुल 5338 में 4920 वोट पड़े थे। यहां से 10 प्रत्याशी मैदान में थे।
समस्तीपुर से भाजपा के हरिनारायण चौधरी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी राजद की रोमा भारती को 1620 मतों से पराजित कर दिया। हरिनारायण चौधरी को 2794 मत मिले। जबकि, रोमा भारती को 1174 मत प्राप्त हुए। कुल पड़े 5884 मतों में 5140 मत वैध मिले। 716 मत रद हो गए।
निर्दलीय राजीव रंजन को 382, वामपंथी प्रत्याशी नीलम देवी को 273, सुनीता सिंह को 237, राजेन्द्र साह को 232, श्वेता यादव को 48 मत मिले। यहां से सात उम्मीदवार मैदान में थे।


विधान परिषद के चुनावो के बाद आज से गिनती की सुरुवात

चुनाव का पुलिंदों के साथ स्थानीय नियत कोटे के अन्तगर्त से विधान परिषद की 24 सीटों के लिए मतगणना का कार्य सुबह आठ बजे से प्रारंभ हो गया है। बहुंत जिलों में बनाए गए मतगणना केंद्रों के अनुसार हर तरह की कड़ी सुरक्षा के बीच मतों की गिनती का काम जारी है।
सुरुवात का अनुसार सात जुलाई को वोटिंग हुई थी। स्थानीय प्राधिकार तथा कार्यकर्ताओ समस्त सहायक से जुड़े तकरीबन 1.38 लाख मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया तथा मतदान दिया । विधान परिषद चुनाव के नतीजों जिस आधार पर आधारित है वो है वह का निर्धारित भविस्य जो राजनीतिक दल बिहार विधानसभा के आगामी चुनावों से जोड़कर हम एख रहे है और समझ रहे है।
राष्ट्रीय लोक समता पार्टी की ओर से दो प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे ,भाजपा ने 18 उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारा था, जबकि लोक जनशक्ति पार्टी की ओर से चार। इसी प्रकार जनता दल (यूनाइटेड) और राष्ट्रीय जनता दल ने दस-दस प्रत्याशी खड़े किए थे, जबकि चार अन्य सीट पर इस गठबंधन की सहयोगी, कांग्रेस और एनसीपी के प्रत्याशी मैदान में थे। चुनाव के लिए राज्य भर में बनाए गए 534 मतदान केंद्रों पर मतदाताओं ने वोट डाले थे।
इस चुनावी लहर में मान्यता का साधार और आधार निर्धारण का न्यूनतम बिंदु है। अमूमन सभी दलों का मानना है कि परिषद चुनाव के नतीजे कई मायने में दलों के प्रति आम आदमी का रूझान बताएंगे। आम आदमी के रुझान से तात्पर्य यह है की आखिर जनता चाहती क्या है चुने हुए प्रतयाशी के अनुसार प्रगति से सम्बंधित नियत इस चुनाव में भाजपा, जदयू, राजद, कांग्रेस, लोजपा, एनसीपी और रालोसपा की ओर से उम्मीदवार खड़े किए गए थे। इसके अलावा बड़ी संख्या में निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी चुनाव में भाग लिया है।


चुनाव को लेकर हर प्रभावी वक्त में बिहार प्रदेश की सरगर्मी

चुनावी बयार बहने तो जरूर लगी, लेकिन अभी इसकी गति मद्धिम है। परखने वाले इसे तूफान के पहले की खामोशी की तरह आंक रहे हैं। दरअसल नेता नहीं चाह रहे कि चुनाव की तूफानी हवा के पहले ही तरकश में इकट्ठा तीर खाली हो जाएं।

शायद यही वजह है कि बड़े नेता बोल तो रहे हैं, लेकिन रोजमर्रा की गतिविधियों पर ही एक-दूसरे पर बयानों के बाण चला रहे हैं। या यूं कहें कि असली तीर तरकश से नहीं निकाले जा रहे।

विश्लेषक मान रहे हैं कि इस चुनाव में कई ऐसे मुद्दे होंगे जो एक दूसरे के खिलाफ रामबाण साबित होंगे। एनडीए से अलग खड़े दल केंद्र सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाएंगे और काला धन और महंगाई जैसे मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएंगे।

कोशिश होगी कि इन बिंदुओं के मुतल्लिक आवाम को अपने पक्ष में किया जाए। दूसरी ओर एनडीए और उसके घटक दल बिहार में जंगलराज, सुशासन का अभाव, प्रदेश सरकार की एनडीए से अलग होने के बाद की स्थितियों का आकलन कर विरोधियों पर हमला बोलने की तैयारी में है।

जानकार बता रहे हैं कि जनता दल यूनाइटेड के नेता चुनाव के दौरान बिहार के साथ केन्द्र द्वारा लगातार किए जा रहे सौतेलापन सा व्यवहार, मांग के अनुरूप मदद का न होना, बिहार के लिए विशेष पैकेज की घोषणा कर उसे पूरा न करना, जैसे मुद्दे उठाकर केन्द्र की भाजपा सरकार पर हमला करने की तैयारी में है।

इससे इतर राष्ट्रीय जनता दल ने काले धन को देश में वापस लाने और आम जनता के एकाउंट में पंद्रह-पंद्रह लाख की रकम का वादा पूरा न होने, भूमि अघिग्र्रहण कानून के बहाने गरीबों की जमीन हड़पने जैसे बिंदुओं को मुद्दा बनाते हुए भाजपा पर हमले की तैयारी की है।

जनता परिवार में घटक के रूप में शामिल कांग्रेस भी बिहार में भी कई मुद्दे तय कर चुकी है, जिसके आधार पर वह एनडीए पर हमला करेगी। कांग्रेस के लिए इस चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा होगा भूमि अधिग्रहण अध्यादेश। कांग्रेस ने चुनाव मैदान में उतरने के पहले ही भूमि अधिग्रहण को ले अपने मनसूबे स्पष्ट कर दिए थे। वैसे भूमि अधिग्रहण बिल गैर एनडीए सभी दलों का मुद्दा है। ये अलग बात है कि इस बिल के विरोध की अगुआई में कांग्रेस है।

दूसरी ओर भाजपा के लिए चुनाव जीतने का सबसे बड़ा मुद्दा होगा राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद और जदयू नेता तथा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मित्रता। भाजपा ने इस मसले को लेकर अभी से सुशासन में लगातार गिरावट और जंगलराज की वापसी को लेकर आवाज उठानी शुरू कर दी है।

बहरहाल विश्लेषक मानते हैं कि अब नेता जी के सही मायने में जुबान खोलने का वक्त आ गया है। मंगलवार को विधान परिषद चुनाव की मतदान प्रक्रिया समाप्त हो गई। अब सिर्फ रिजल्ट आना शेष हैं। तमाम लोगों का ऐसा मानना है कि परिषद चुनाव के रिजल्ट आने के बाद नेताओं की जुबान में पड़ा ताला खुलेगा। इसके बाद वे अपने तरकश में जमा तीर बाहर निकालेंगे और कोशिश करेंगे कि सामने वाले का चक्रव्यूह भेद सकें।


चुनाव को लेकर हर प्रभावी वक्त में बिहार प्रदेश की सरगर्मी

चुनावी बयार बहने तो जरूर लगी, लेकिन अभी इसकी गति मद्धिम है। परखने वाले इसे तूफान के पहले की खामोशी की तरह आंक रहे हैं। दरअसल नेता नहीं चाह रहे कि चुनाव की तूफानी हवा के पहले ही तरकश में इकट्ठा तीर खाली हो जाएं।शायद यही वजह है कि बड़े नेता बोल तो रहे हैं, लेकिन रोजमर्रा की गतिविधियों पर ही एक-दूसरे पर बयानों के बाण चला रहे हैं। या यूं कहें कि असली तीर तरकश से नहीं निकाले जा रहे।

विश्लेषक मान रहे हैं कि इस चुनाव में कई ऐसे मुद्दे होंगे जो एक दूसरे के खिलाफ रामबाण साबित होंगे। एनडीए से अलग खड़े दल केंद्र सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाएंगे और काला धन और महंगाई जैसे मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएंगे।

कोशिश होगी कि इन बिंदुओं के मुतल्लिक आवाम को अपने पक्ष में किया जाए। दूसरी ओर एनडीए और उसके घटक दल बिहार में जंगलराज, सुशासन का अभाव, प्रदेश सरकार की एनडीए से अलग होने के बाद की स्थितियों का आकलन कर विरोधियों पर हमला बोलने की तैयारी में है।

जानकार बता रहे हैं कि जनता दल यूनाइटेड के नेता चुनाव के दौरान बिहार के साथ केन्द्र द्वारा लगातार किए जा रहे सौतेलापन सा व्यवहार, मांग के अनुरूप मदद का न होना, बिहार के लिए विशेष पैकेज की घोषणा कर उसे पूरा न करना, जैसे मुद्दे उठाकर केन्द्र की भाजपा सरकार पर हमला करने की तैयारी में है।

इससे इतर राष्ट्रीय जनता दल ने काले धन को देश में वापस लाने और आम जनता के एकाउंट में पंद्रह-पंद्रह लाख की रकम का वादा पूरा न होने, भूमि अघिग्र्रहण कानून के बहाने गरीबों की जमीन हड़पने जैसे बिंदुओं को मुद्दा बनाते हुए भाजपा पर हमले की तैयारी की है।

जनता परिवार में घटक के रूप में शामिल कांग्रेस भी बिहार में भी कई मुद्दे तय कर चुकी है, जिसके आधार पर वह एनडीए पर हमला करेगी। कांग्रेस के लिए इस चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा होगा भूमि अधिग्रहण अध्यादेश। कांग्रेस ने चुनाव मैदान में उतरने के पहले ही भूमि अधिग्रहण को ले अपने मनसूबे स्पष्ट कर दिए थे। वैसे भूमि अधिग्रहण बिल गैर एनडीए सभी दलों का मुद्दा है। ये अलग बात है कि इस बिल के विरोध की अगुआई में कांग्रेस है।

दूसरी ओर भाजपा के लिए चुनाव जीतने का सबसे बड़ा मुद्दा होगा राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद और जदयू नेता तथा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मित्रता। भाजपा ने इस मसले को लेकर अभी से सुशासन में लगातार गिरावट और जंगलराज की वापसी को लेकर आवाज उठानी शुरू कर दी है।

बहरहाल विश्लेषक मानते हैं कि अब नेता जी के सही मायने में जुबान खोलने का वक्त आ गया है। मंगलवार को विधान परिषद चुनाव की मतदान प्रक्रिया समाप्त हो गई। अब सिर्फ रिजल्ट आना शेष हैं। तमाम लोगों का ऐसा मानना है कि परिषद चुनाव के रिजल्ट आने के बाद नेताओं की जुबान में पड़ा ताला खुलेगा। इसके बाद वे अपने तरकश में जमा तीर बाहर निकालेंगे और कोशिश करेंगे कि सामने वाले का चक्रव्यूह भेद सकें।


National Education Day Celebration

The country celebrated the National Education Day on 11th November, 2014, which was the birth anniversary of India’s great freedom movement leader Maulana Abul Kalam Azad. On the occasion, President of India Shri Pranab Mukherjee, Minister of Human Resource Development, Smt. Smriti Zubin Irani, Minister of Minority

Affairs, Dr. Najma A. Heptulla, Minister of State, Human Resource Development, Shri Upendra Kushwaha and Minister of State, Human Resource Development, Prof (Dr.) Ram Shankar Katheria paid floral tributes to the great visionary and first Education Minister of Independent India.

To mark the celebration of National Education Day, the following new initiatives were started by the Ministry of HRD-

• “Saksham” which is a college level scholarship for differently abled, needy and meritorious children.

• “Pragati” which is a scholarship for girl students who are pursuing technical education at college level.

• Skill Credit Framework document which provides a Skill Assessment Matrix for Vocational Advancement of Youth (SAMAVAY). SAMAVAY allows multiple pathways between Vocational education – skills, education and job markets. This will facilitate India to harness the potential of young India.

• “Know your College Portal” which is an application developed for helping a prospective student make a valued judgment of the college he / she wishes to join by providing him / her the necessary information about the college.

• “Unnat Bharat Abhiyan” to involve higher educational institutions to work with the people of rural India in identifying development challenges and evolving appropriate solutions for accelerating sustainable growth.

Speaking on the occasion, Minister of Human Resource Development, Smt Smrirti Zubin Irani, recalled Maulana Abul Kalam Azad’s contribution towards nation building and in the field of education. Emphasizing the importance of teacher in education, Smt. Irani said that they are fulcrum of entire education system. Teacher should not merely be concerned with ‘INCOME’ but also the ‘OUTCOME’ to help improve the quality of education. She said that the Mission of Unnat Bharat Abhiyan is to enable higher educational institutions to work with the people of rural India in identifying development challenges and evolving appropriate solutions for accelerating sustainable growth.

Dr. Najma Heptullah, remembering Maulana Azad, said that there is clearly a need to adopt a pragmatic view that blends modernity into tradition and synthesizes our inherent traditional strengths with modern day needs without losing our values. It is indeed these very views that Maulanaji reflected which were much ahead of the times he lived in. Maulanaji had advised her not only to achieve higher education degree but also be adequately adept in the chosen field so that people recognize you by your competence not by your family, religion or area.

Shri Pranab Mukherjee, the President of India, extolled the exemplary contributions of Maulana Azad in nation-building, institution-building and particularly his indelible imprints in the field of education. He mentioned that Maulana Azad said that Schools are laboratory which produce future citizens of the country. Hence, adequate care should be taken to impart quality education.

Earlier in the beginning of the function, Shri Satya N. Mohanty, Secretary (Higher Education) delivered the welcome address. The vote of thanks was presented by Shri R. Bhattacharya, Secretary (School Education & Literacy).


Upendra Kushwaha (Karakat) with him we are hoping for good future of BIHAR.

Upendra Kushwaha (born 2 June 1960) is an Indian politician and Minister of State in Government of India. He is Member of Parliament From Karakat in Bihar. He is a former member of Rajya Sabha and a leader of Rashtriya Lok Samata Party.[1] He founded Rashtriya Lok Samata Party[1] on 3 March 2013 and unveiled the name and flag of his party at an impressive rally at the historic Gandhi Maidan. Kushwaha and socialist leader Rambihari Singh are as founder National President and National Genral Secretary of the party respectively. Apparently eyeing the support of minorities and the Most Backward Castes (MBCs) for revival of his fledgling political career, the RLSP founding leader lambasted both Chief Minister Nitish Kumar and RJD supremo Lalu Prasad Yadav for fooling the people of Bihar for over two decades with one false promise or another. RLSP offered a delivery in terms of concrete results if voted to power and ensure economic development of Bihar and welfare of its people. In February 2014, Rashtriya Lok Samata Party entered into an alliance with BJP led National Democratic Alliance. As per the alliance, RLSP contestd on three seats from Bihar for 2014 General Elections namely Sitamarhi, Karakat and Jahanabad and it won from all the three seats respectively riding on the Narendra Modi wave which swept the 2014 Lok Sabha General Elections.


इस बार कुछ अलग नहीं कुछ नया कहा गया है : उपेन्द्र कुशवाहा।

Union Minister Upendra Kushwaha also said that he was not in favor of any law to check conversion as there are already provisions to check coercion and allurement for conversion.

To a question on whether the issue of conversion was taking away the spotlight from the issue of development, Kushwaha, in an interview to PTI, said, "definitely it does take away the focus. They (saffron hardliners) should keep this in mind that the only agenda of this government is development. They should allow the government and Prime Minister Narendra Modi to do that."Opposition should not be given an opportunity to raise this issue all the time. The Prime Minister also wants that the only focus area should be development," he said.

Kushwaha, a former JD(U) MP, who heads the Loktantrik Samata Party and had allied with BJP in last Lok Sabha polls, also felt that had these issues not cropped up, the BJP would have been able to win few seats even in Kashmir Valley and that the "damage" will continue if this practice is not put to an end.

With Delhi slated to go to polls soon, the Union Minister also sounded a word of caution saying that such issues damage the prospects and hence "the focus should only be on development" during Delhi polls.

"Such talks do the damage. It has happened. The kind of crowds that Prime Minister Modi was getting in the Valley, it was possible that the BJP could have won one or two seats at least," Kushwaha added.


राष्ट्रीय लोक समता पार्टी उपेंद्र कुशवाहा द्वारा लॉन्च की गयी। राष्ट्रीय लोक समता पार्टी ने लोगों की आर्थिक बिहार के विकास और कल्याण को सुनिश्चित अगर RLSP ठोस परिणाम के मामले में एक वितरण की पेशकश की। राष्ट्रीय दल एक राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करता है और यह दल बिहार की अद्भुत भविष्य का प्रतिनिधित्व करता है।हमारी पार्टी युवाओं और किसानों की ताकत से बिहार का नवनिर्माण करेगी.‘जय जवान जय किसान-मिलके करेंगे नवनिर्माण’

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रालोसपा राष्ट्रीयता को प्रधानतम रखता है, हर भारतीय, चाहे उसकी जाति, पंथ या धर्म कुछ भी हो वो सब से पहले एक भारतीय है जहां सच 'राष्ट्रीय' राजनीति में विश्वास रखता है। यह कुरीति  और समाज के विभाजन की संकीर्ण राजनीति में विश्वास नहीं करता। पार्टी के एजेंडे को देश के लिए अपने प्यार के आधार पर लोगों को एकजुट करने के लिए है। इस पहचान को प्रधानता एक बार फिर से एक सांस्कृतिक और आर्थिक महाशक्ति के रूप में भारत का फिर से उद्भव के लिए मार्ग चार्ट होगा और यह हमारे देश के लिए गौरव प्रदान करेगा।

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एक तथ्य के आधार पर कार्यान्वित होने के लिए पार्टी के कारण पार्टी का प्रसार-संचार, और कैसे देश के लिए अपनी प्रमुख प्रधान जनता की सेवा करना ही लक्ष्य है। यह सरकार या समुदायों की तरह नहीं बल्कि हमारे लोकतांत्रिक लोगों के लिए हम सामाजिक या पर्यावरणीय प्रभाव के रूप साबित होते हैं। विचार-विमर्श उद्देश्य है। मूल्यों का आधार एक व्यक्ति या समूह का विश्वास बनाए रखना हैं, और इस मामले में संगठन को हर प्रकार से यानि, जिसमें तथ्यात्मक और भावनात्मक रूप से निर्णयबध्य होना होगा अटल और अविचारणीय स्तिथि के समक्ष ।

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