राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP) 26 दिसंबर को पटना में दलित महासम्मेलन आयोजित, 2014 केन्द्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा मुख्य अतिथि थे।

कुशवाहा जी ने आगे बढ़कर एक नया पावदान इस लिए बना पाए है क्यूंकि उन्होंने भारत को समझा है छेत्रक के अनुसार बिहार को समझा है। दलितों के लिए आंदोलन किया क्यूंकि उनको भलीभांति ज्ञात है की यह वह वर्ग है जिसमे देश का भविष्य है। बिहार का भविष्य है। यह कथन सदियों से चलता आया है। अमीर और अमीर हो जाता है। माध्यम वर्ग उठने की कोसिस करता रह जाता है। मगर निम्न वर्ग निम्न ही रह जाता है। दलित का आधार हम है और वह देश का आधार है और निम्न वर्ग वालो को अधिकार दिलाना अमर कर्त्तव्य है और यही इस रैली का मकसद। दलित हजारों वर्षों तक अस्‍पृश्‍य समझी जाने वाली उन तमाम जातियों के लिए सामूहिक रूप से प्रयुक्‍त होता है जो हिंदू समाज व्‍यवस्‍था में सबसे निचले पायदान पर स्थित है। संवैधानिक भाषा में इन्‍हें ही अनुसूचित जाति कहा गया है। भारत की जनसंख्‍या में लगभग 16 प्रतिशत आबादी दलितों की है। दलित शब्‍द का शाब्दिक अर्थ है- दलन किया हुआ। इसके तहत वह हर व्‍यक्ति आ जाता है जिसका शोषण-उत्‍पीडन हुआ है। रामचंद्र वर्मा ने अपने शब्‍दकोश में दलित का अर्थ लिखा है, मसला हुआ, मर्दित, दबाया, रौंदा या कुचला हुआ, विनष्‍ट किया हुआ।[4] पिछले छह-सात दशकों में 'दलित' पद का अर्थ काफी बदल गया है। डॉ॰ भीमराव अंबेडकर के आंदोलन के बाद यह शब्‍द हिंदू समाज व्‍यवस्‍था में सबसे निचले पायदान पर स्थित हजारों वर्षों से अस्‍पृश्‍य समझी जाने वाली तमाम जातियों के लिए सामूहिक रूप से प्रयोग होता है। अब दलित पद अस्‍पृश्‍य समझी जाने वाली जातियों की आंदोलनधर्मिता का परिचायक बन गया है। भारतीय संविधान में इन जातियों को अनुसूचित जातिनाम से अभिहित किया गया है। भारतीय समाज में वाल्‍मीकि या भंगी को सबसे नीची जाति समझा जाता रहा है और उसका पारंपरिक पेशा मानव मल की सफाई करना रहा है। आज भी गांव से शहरों तक में सफाई के कार्यो में इसी जाति के लोग सर्वाधिक हैं।
ऐतिहासिक पन्नें
भारत में दलित आंदोलन की शुरूआत ज्योतिराव गोविंदराव फुले के नेतृत्व में हुई। ज्योतिबा जाति से माली थे और समाज के ऐसे तबके से संबध रखते थे जिन्हे उच्च जाति के समान अधिकार नहीं प्राप्त थे। इसके बावजूद ज्योतिबा फूले ने हमेशा ही तथाकथित 'नीची' जाति के लोगों के अधिकारों की पैरवी की। भारतीय समाज में ज्योतिबा का सबसे दलितों की शिक्षा का प्रयास था। ज्योतिबा ही वो पहले शख्स थे जिन्होंन दलितों के अधिकारों के साथ-साथ दलितों की शिक्षा की भी पैरवी की। इसके साथ ही ज्योति ने महिलाओं के शिक्षा के लिए सहारनीय कदम उठाए। भारतीय इतिहास में ज्योतिबा ही वो पहले शख्स थे जिन्होंने दलितों की शिक्षा के लिए न केवल विद्यालय की वकालत की बल्कि सबसे पहले दलित विद्यालय की भी स्थापना की। ज्योति में भारतीय समाज में दलितों को एक ऐसा पथ दिखाया था जिसपर आगे चलकर दलित समाज और अन्य समाज के लोगों ने चलकर दलितों के अधिकारों की कई लड़ाई लडी। यूं तो ज्योतिबा ने भारत में दलित आंदोलनों का सूत्रपात किया था लेकिन इसे समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का काम बाबा साहब अम्बेडकर ने किया। एक बात और जिसका जिक्र किए बिना दलित आंदोलन की बात बेमानी होगी वो है बौद्ध धर्म। ईसा पूर्व 600 ईसवी में ही बौद्घ धर्म ने समाज के निचले तबकों के अधिकारों के लिए आवाज़ उठाई। बुद्घ ने इसके साथ ही बौद्ध धर्म के जरिए एक सामाजिक और राजनीतिक क्रांति लाने की भी पहल की। इसे राजनीतिक क्रांति कहना इसलिए जरूरी है क्योंकि उस समय सत्ता पर धर्म का आधिपत्य था और समाज की दिशा धर्म के द्वारा ही तय की जाती थी। ऐसे में समाज के निचले तलबे को क्रांति की जो दिशा बुद्घ ने दिखाई वो आज भी प्रासांगिक है। भारत में चार्वाक के बाद बुद्घ ही पहले ऐसे शख्स थे जिन्होंने ब्राह्मणवाद के खिलाफ न केवल आवाज उठाई बल्कि एक दर्शन भी दिया। जिससे कि समाज के लोग बौद्घिक दासता की जंजीरों से मुक्त हो सकें। यदि समाज के निचले तबकों के आदोलनों का आदिकाल से इतिहास देखा जाए तो चार्वाक को नकारना भी संभव नहीं होगा। यद्यपि चार्वाक पर कई तरह के आरोप लगाए जाते हैं इसके बावजूद चार्वाक वो पहला शख्स था जिसने लोगों को भगवान के भय से मुक्त होने सिखाया। भारतीय दर्शन में चार्वाक ने ही बिना धर्म और ईश्वर के सुख की कल्पना की। इस तर्ज पर देखने पर चार्वाक भी दलितों की आवाज़ उठाता नज़र आता है।....खैर बात को लौटाते हैं उस वक्त जिस वक्त दलितों के अधिकारों को कानूनी जामा पहनाने के लिए भारत रत्न बाबा साहेब भीम राव अंबेडकर ने लड़ाई शुरू कर दी थी।..वक्त था जब हमारा देश भारत ब्रिटिश उपनिवेश की श्रेणी में आता था। लोगों के ये दासता का समय रहा हो लेकिन दलितों के लिए कई मायनों में स्वर्णकाल था।

राष्ट्रीय लोक समता पार्टी उपेंद्र कुशवाहा द्वारा लॉन्च की गयी। राष्ट्रीय लोक समता पार्टी ने लोगों की आर्थिक बिहार के विकास और कल्याण को सुनिश्चित अगर RLSP ठोस परिणाम के मामले में एक वितरण की पेशकश की। राष्ट्रीय दल एक राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करता है और यह दल बिहार की अद्भुत भविष्य का प्रतिनिधित्व करता है।हमारी पार्टी युवाओं और किसानों की ताकत से बिहार का नवनिर्माण करेगी.‘जय जवान जय किसान-मिलके करेंगे नवनिर्माण’

Read More !

रालोसपा राष्ट्रीयता को प्रधानतम रखता है, हर भारतीय, चाहे उसकी जाति, पंथ या धर्म कुछ भी हो वो सब से पहले एक भारतीय है जहां सच 'राष्ट्रीय' राजनीति में विश्वास रखता है। यह कुरीति  और समाज के विभाजन की संकीर्ण राजनीति में विश्वास नहीं करता। पार्टी के एजेंडे को देश के लिए अपने प्यार के आधार पर लोगों को एकजुट करने के लिए है। इस पहचान को प्रधानता एक बार फिर से एक सांस्कृतिक और आर्थिक महाशक्ति के रूप में भारत का फिर से उद्भव के लिए मार्ग चार्ट होगा और यह हमारे देश के लिए गौरव प्रदान करेगा।

Read More !

एक तथ्य के आधार पर कार्यान्वित होने के लिए पार्टी के कारण पार्टी का प्रसार-संचार, और कैसे देश के लिए अपनी प्रमुख प्रधान जनता की सेवा करना ही लक्ष्य है। यह सरकार या समुदायों की तरह नहीं बल्कि हमारे लोकतांत्रिक लोगों के लिए हम सामाजिक या पर्यावरणीय प्रभाव के रूप साबित होते हैं। विचार-विमर्श उद्देश्य है। मूल्यों का आधार एक व्यक्ति या समूह का विश्वास बनाए रखना हैं, और इस मामले में संगठन को हर प्रकार से यानि, जिसमें तथ्यात्मक और भावनात्मक रूप से निर्णयबध्य होना होगा अटल और अविचारणीय स्तिथि के समक्ष ।

Read More !

Give us a Miss Call for Membership : 1800 - 313 - 1838

Dial No