चुनाव को लेकर हर प्रभावी वक्त में बिहार प्रदेश की सरगर्मी

चुनावी बयार बहने तो जरूर लगी, लेकिन अभी इसकी गति मद्धिम है। परखने वाले इसे तूफान के पहले की खामोशी की तरह आंक रहे हैं। दरअसल नेता नहीं चाह रहे कि चुनाव की तूफानी हवा के पहले ही तरकश में इकट्ठा तीर खाली हो जाएं।

शायद यही वजह है कि बड़े नेता बोल तो रहे हैं, लेकिन रोजमर्रा की गतिविधियों पर ही एक-दूसरे पर बयानों के बाण चला रहे हैं। या यूं कहें कि असली तीर तरकश से नहीं निकाले जा रहे।

विश्लेषक मान रहे हैं कि इस चुनाव में कई ऐसे मुद्दे होंगे जो एक दूसरे के खिलाफ रामबाण साबित होंगे। एनडीए से अलग खड़े दल केंद्र सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाएंगे और काला धन और महंगाई जैसे मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएंगे।

कोशिश होगी कि इन बिंदुओं के मुतल्लिक आवाम को अपने पक्ष में किया जाए। दूसरी ओर एनडीए और उसके घटक दल बिहार में जंगलराज, सुशासन का अभाव, प्रदेश सरकार की एनडीए से अलग होने के बाद की स्थितियों का आकलन कर विरोधियों पर हमला बोलने की तैयारी में है।

जानकार बता रहे हैं कि जनता दल यूनाइटेड के नेता चुनाव के दौरान बिहार के साथ केन्द्र द्वारा लगातार किए जा रहे सौतेलापन सा व्यवहार, मांग के अनुरूप मदद का न होना, बिहार के लिए विशेष पैकेज की घोषणा कर उसे पूरा न करना, जैसे मुद्दे उठाकर केन्द्र की भाजपा सरकार पर हमला करने की तैयारी में है।

इससे इतर राष्ट्रीय जनता दल ने काले धन को देश में वापस लाने और आम जनता के एकाउंट में पंद्रह-पंद्रह लाख की रकम का वादा पूरा न होने, भूमि अघिग्र्रहण कानून के बहाने गरीबों की जमीन हड़पने जैसे बिंदुओं को मुद्दा बनाते हुए भाजपा पर हमले की तैयारी की है।

जनता परिवार में घटक के रूप में शामिल कांग्रेस भी बिहार में भी कई मुद्दे तय कर चुकी है, जिसके आधार पर वह एनडीए पर हमला करेगी। कांग्रेस के लिए इस चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा होगा भूमि अधिग्रहण अध्यादेश। कांग्रेस ने चुनाव मैदान में उतरने के पहले ही भूमि अधिग्रहण को ले अपने मनसूबे स्पष्ट कर दिए थे। वैसे भूमि अधिग्रहण बिल गैर एनडीए सभी दलों का मुद्दा है। ये अलग बात है कि इस बिल के विरोध की अगुआई में कांग्रेस है।

दूसरी ओर भाजपा के लिए चुनाव जीतने का सबसे बड़ा मुद्दा होगा राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद और जदयू नेता तथा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मित्रता। भाजपा ने इस मसले को लेकर अभी से सुशासन में लगातार गिरावट और जंगलराज की वापसी को लेकर आवाज उठानी शुरू कर दी है।

बहरहाल विश्लेषक मानते हैं कि अब नेता जी के सही मायने में जुबान खोलने का वक्त आ गया है। मंगलवार को विधान परिषद चुनाव की मतदान प्रक्रिया समाप्त हो गई। अब सिर्फ रिजल्ट आना शेष हैं। तमाम लोगों का ऐसा मानना है कि परिषद चुनाव के रिजल्ट आने के बाद नेताओं की जुबान में पड़ा ताला खुलेगा। इसके बाद वे अपने तरकश में जमा तीर बाहर निकालेंगे और कोशिश करेंगे कि सामने वाले का चक्रव्यूह भेद सकें।

राष्ट्रीय लोक समता पार्टी उपेंद्र कुशवाहा द्वारा लॉन्च की गयी। राष्ट्रीय लोक समता पार्टी ने लोगों की आर्थिक बिहार के विकास और कल्याण को सुनिश्चित अगर RLSP ठोस परिणाम के मामले में एक वितरण की पेशकश की। राष्ट्रीय दल एक राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करता है और यह दल बिहार की अद्भुत भविष्य का प्रतिनिधित्व करता है।हमारी पार्टी युवाओं और किसानों की ताकत से बिहार का नवनिर्माण करेगी.‘जय जवान जय किसान-मिलके करेंगे नवनिर्माण’

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रालोसपा राष्ट्रीयता को प्रधानतम रखता है, हर भारतीय, चाहे उसकी जाति, पंथ या धर्म कुछ भी हो वो सब से पहले एक भारतीय है जहां सच 'राष्ट्रीय' राजनीति में विश्वास रखता है। यह कुरीति  और समाज के विभाजन की संकीर्ण राजनीति में विश्वास नहीं करता। पार्टी के एजेंडे को देश के लिए अपने प्यार के आधार पर लोगों को एकजुट करने के लिए है। इस पहचान को प्रधानता एक बार फिर से एक सांस्कृतिक और आर्थिक महाशक्ति के रूप में भारत का फिर से उद्भव के लिए मार्ग चार्ट होगा और यह हमारे देश के लिए गौरव प्रदान करेगा।

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एक तथ्य के आधार पर कार्यान्वित होने के लिए पार्टी के कारण पार्टी का प्रसार-संचार, और कैसे देश के लिए अपनी प्रमुख प्रधान जनता की सेवा करना ही लक्ष्य है। यह सरकार या समुदायों की तरह नहीं बल्कि हमारे लोकतांत्रिक लोगों के लिए हम सामाजिक या पर्यावरणीय प्रभाव के रूप साबित होते हैं। विचार-विमर्श उद्देश्य है। मूल्यों का आधार एक व्यक्ति या समूह का विश्वास बनाए रखना हैं, और इस मामले में संगठन को हर प्रकार से यानि, जिसमें तथ्यात्मक और भावनात्मक रूप से निर्णयबध्य होना होगा अटल और अविचारणीय स्तिथि के समक्ष ।

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